* " भ्रष्टाचारी " मीडिया को खरीदने का दम भरता हो, फिर आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि भला मीडिया से कौन डरता है।
" भ्रष्टाचारी " मीडिया को खरीदने का दम भरता हो, फिर आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि भला मीडिया से कौन डरता है। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर इस वर्ष विषय दिया गया है मीडिया से कौन डरता है। मीडिया से कौन नहीं डरता है। प्रश्न वाकई ही मीडिया को आईना दिखाने वाला है । कि मीडिया से कौन नहीं डरता है। लगता है वर्तमान में मीडिया "सूचना संवाहक" नहीं डरने डराने का जिम्मा संभाले हुए हैं। साहब मीडिया से आखिर कोई डरे भी तो क्यों डरे । क्योंकि मीडिया समाज का एक सजग प्रहरी है । लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है। " प्रहरी के भरोसे सब कुछ छोड़ कर जब समाज चैन की नींद सोता है तो वह मीडिया उसे डराता नहीं साहब सहलाता है।" मीडिया आमजन की समस्याओं, उसके दर्द के निदान ,उसकी मूलभूत जरूरतों को पूर्ण करने के लिए सरकार को जगाता है । तर्क देकर समझता है साहब सरकार और आमजन के बीच का सेतु ...