एक सकारात्मक पहल बदल रही है पांगी घाटी की तस्वीर
- स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल है “सेवा संस्था”।
- एक सकारात्मक पहल से बदली “पांगी घाटी ” की तस्वीर।
- पांगी की हर्बल चाय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार पाने को अग्रसर।
- 5000 से भी अधिक महिलाएं और डेढ़ हजार से अधिक किसान जुड़े हैं सेवा संस्था से ।
- अब ग्रामीण पर्यटन से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किए जा रहे हैं लोग ।
साल अधिकांश महीनों तक बर्फ की चारदीवारी में घिरे रहने वाले प्रदेश के अत्यंत दुर्गम कबायली इलाके पांगी घाटी के बाशिंदों को वर्ष भर के लिए अपनी निजी आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए न केवल प्राकृतिक संसाधनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है अपितु क्षमता से भी अधिक परिश्रम भी करना पड़ता है।
समुंदर तल से लगभग 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंबा जिला की पांगी घाटी केवल दुर्गम और जोखिम भरे जीवन के लिए ही विख्यात नहीं है बल्कि यहां प्रकृति ने इस अदभुत घाटी को अनेकों बहुमुल्य श्रेष्ठ सौगातों से भी लबरेज भी किया है ।
यहां जीरा ,अखरोट ,शहद , गुरणु हर्बल चाय ,शिलाजीत, खुबानी ,सेब , ठांगी इत्यादि भरपूर मात्रा में उत्पादित होता है ।
लेकिन मुख्यालय से लंबी दूरी और किसी उचित मार्केट तक पहुंच न हो पाने की वजह से यहां के किसानों- बागवानों को अपने उत्पादों को विवशतावश औने- पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने के लिए बाध्य होना पड़ता था जिस कारण लोगों की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर बनी हुई थी।
इस स्थिति में इस क्षेत्र के लोगों के बर्फ से सफेद चादर में लिपटे जीवन को जागरुकता की तूलिका से स्पर्श करके सम्पनता की रंगीन चादर में ऊकेरने के लिए संगठन का ताना-बाना बुनने के लिए स्वयंसेवी संस्था “सेवा” ने एक अनूठी व सार्थक पहल की।
सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ हरेश शर्मा व उनके सहयोगियों ने दुर्गम व पिछड़ी घाटी पांगी की महिलाओं को जागरूक करने के लिए घाटी के हर “घर द्वार” पर दस्तक देनी आरंभ की ताकि मातृशक्ति के सशक्तिकरण हेतु उन्हें आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक पहल को अमलीजामा पहनाया जा सके । उन्होंने किसानों और बागवानों की आर्थिकी को सुदृढ़ करने के लिए और उनके उत्पादों को उचित दाम दिलवाने के लिए न केवल उन्हें संगठित करके उनके उत्पादों को मार्केट उपलब्ध करवाने की दिशा में व्यापक प्रयास ही किए अपितु उनकी आर्थिकी में सुधार व बढ़ोत्तरी करने के लिए चम्बा मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित उदयपुर के तोडोली स्थान पर “पांगी हिल्स ट्राईबल मार्ट ” स्थापित करके पहाड़ में समृद्धि की गाथा चित्रित करने के लिए एक अनुकरणीय अध्याय का सूत्रपात भी किया है । जिसके अत्यंत सुखद परिणाम भी आना आरंभ हो चुके हैं। वर्तमान में सेवा संस्था के साथ लगभग पांच हजार महिलाएं व करीब डेढ़ हजार से भी अधिक किसान बागवान जुड़ चुके हैं और यह प्रक्रिया निरन्तर द्रुत गति से जारी है।
वर्तमान में बिचौलियों की भूमिका शुन्य होने के फलस्वरुप अब किसानों बागवानों को न केवल उनके परिश्रम के अनुरूप उत्पादों का उचित मूल्य ही प्राप्त हो रहा है बल्कि उपभोक्ताओं को भी पहले की अपेक्षा कम दामों पर गुणवत्ता पूर्वक, पौष्टिक,जैविक तथा प्राकृतिक उत्पात सहजता से उपलब्ध हो रहें ।
अब पांगी हिल्स ट्राईबल मार्ट में संस्था के साथ जुड़े लोगों के हस्त निर्मित व प्राकृतिक उत्पादों को सीधे तौर पर उपभोक्ताओं तक उपलब्ध करवाये जाने वाले विशेष उत्पादों में मुख्यतः अखरोट व खुबानी का तेल, शहद, ज़ीरा, शिलाजीत ,गुरणु हर्बल चाय ,अखरोट,ठांगी, खुबानी के अतिरिक्त धातु व लकड़ी की मूर्तियां ,टोपी शॉल, जुराबें, चम्बा रुमाल ,चुख, जरीस, चप्पलें, सेब तथा सेब का जूस व जैम इत्यादि स्थानीय व अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद ने शुमार हो रहे हैं
पांगी की हर्बल चाय की विदेशों में भी की जा रही है पसंद ।
पांगी घाटी की गुरणु हर्बल चाय को “सेवा” संस्था के प्रयासों से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध करवाने की कवायद जारी है । वर्तमान में 300 से भी अधिक महिलाएं इस चाय का उत्पादन करके धनोपार्जन कर रही हैं।विश्व स्तर पर इस चाय की प्रभावी पहुंच बनाने में कारगर भूमिका निभाने वाली यह महिलाएं रूस, कजाकिस्तान,साऊदी अरब इत्यादि देशों तक घाटी की चाय की सुगंध बिखेर रही हैं।अब यह चाय सेवा संस्था द्वारा ऑनलाइन आर्डर पर भी उपलब्ध करवाई जा रही है । औषधीय गुणों से भरपूर गुरणु हर्बल चाय अनेकों बीमारियों के निदान के लिए रामबाण सिद्ध होती है । इसके महत्व को देखते हुए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड ) द्वारा घाटी की महिलाओं को पैकिंग व ग्रेडिंग के संदर्भ में बाकायदा प्रशिक्षण दिलवाया गया है ।इन्हें इस क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए ऋण भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।
पांगी के सेब की है भारी मांग
पांगी घाटी में उत्पन्न होने वाला सेब अपने बहुत से गुणों और विशेषताओं के कारण वर्षों से लोगों में अहम स्थान बनाए हुए हैं। पूर्णतया जैविक खाद की और किसी भी रसायन के छिड़काव रहित तैयार यह सेब सहजता से मार्केट में उपलब्ध नहीं हो पाता था। सेवा संस्था द्वारा पांगी हिल्स मार्ट चंबा में पांगी के सेब व सेब के जूस व जैम को पहली बार इस वर्ष उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध करवाया जा रहा है । जिसे लोग हाथों- हाथ ले रहे हैं। वहीं बागवानों में भी अच्छा दाम मिलने के चलते खुशी की लहर व्याप्त है।
क्या कहते हैं सेवा संस्था के अध्यक्ष हरेश शर्मा
सेवा संस्था के अध्यक्ष डॉ हरीश शर्मा का कहना है की, सेवा संस्था का मुख्य उद्देश्य जिला के समस्त स्वंय सहायता समूहों व किसानों बागवानों , हस्त शिल्प से जुड़े कलाकारों के उत्पादों को एक ऐसा मंच अथवा बाजार उपलब्ध करवाना है जहां उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए भटकाना न पड़े। उन्हें बिचौलियों से छुटकारा मिले और उनके परिश्रम का सही मूल्य प्राप्त हो । साथ ही उनके जीवन स्तर में सुधार व बढ़ोतरी भी हो । उनका आगामी लक्ष्य यहां के विशिष्ट उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना है । पांगी हिल्स को जहां पेटेंट करवाने की कवायद जारी है वही देश भर के बाजारों में यहां के उत्पादों को उपलब्ध भी करवाया जा रहा है ।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि चंबा जिला के ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तथा लोगों की आर्थिकी में सुधार लाने के उद्देशय से होम स्टे योजना के महत्व से लोगों को अवगत कराया जा रहा है। चम्बा की समृद्ध धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व पारम्परिक विरासत से रूबरू करवाकर समस्त जिला चम्बा के पर्यटन विकास को गति प्रदान करने की मुहिम को अमलीजामा पहनाने के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाई जा रही है।








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