देसी गाय ने दिलवाई राष्ट्रीय स्तर पहचान
- हर आंगन के खूटें पर हो पहाड़ी गाय का बसेरा -आर्दश गुप्ता
- देसी गाय ने दिलवाई राष्ट्रीय स्तर पहचान
- गुणवत्ता, शुद्धता और अमृत की खान है पहाड़ी गाय का दूध
- वर्ष 2018 को राष्ट्रीय गोपाल रत्न से सम्मानित हैं आर्दश गुप्ता
पीढ़ियों से चले आ रहे अपने पुश्तैनी व्यवसाय को न अपनाकर कुछ अलग करने की चाहत पाले “आर्दश गुप्ता” का बचपन का सपना था कि वह कुठ ऐसा कर गुजरे कि उनकी अपनी अलग पहचान और नाम तो हो ही साथ में समाज के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण भूमिका भी हो जिससे अधिक से अधिक लोग लाभान्वित भी हो।
बिलासपुर जिला के सदर विधानसभा क्षेत्र की पंचायत कोठीपुरा में 12 नवम्बर, 1978 को “नन्द प्रकाश वोहरा ” के घर पैदा हुए बालक आर्दश गुप्ता के वाल्यावस्था के स्वपन को “गौवंश” ने न केवल साकार ही किया, अपितु केन्द्रिय “कृषि एवं किसान कल्याण” मंत्री राधा मोहन सिंह के हाथों “विश्व दुग्ध दिवस” के अवसर पर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान भवन दिल्ली में पहाड़ी व उत्तर पूर्व क्षेत्र के राष्ट्रीय गोपाल रत्न अवार्ड, 2018 से पुरस्कृत करवाकर उनको उपलब्धियों पर राष्ट्रीय स्तर पर मोहर भी लगवा दी।
वर्ष 1991 में मात्र एक गांय से आरम्भ किए गए दुग्ध उत्पादन के कार्य को आर्दश गुप्ता ने पशु पालन विभाग के मार्ग दर्शन और अपनी लग्न, परिश्रम और सद्भावना के निर्वहण बल पर वर्तमान मे 150 से भी अधिक गौवंश तक पहुंचाकर स्वयं को किसानों के बीच एक आर्दश के रूप में भी स्थापित कर लिया है।
जहां किसान व पशुपालक उन से आधुनिक विधि से गौवंश पालने का भी प्रशिक्षण प्राप्त करते है। बीस से भी अधिक परिवारों का गुजर बसर भी हो रहा है इस गौशाला के माध्यम से।
आर्दश गुप्ता की पांच बीघा से भी अधिक क्षेत्र में फैली गौशाला में सिंध की “साहीवाल” राजस्थान की “धारपारक“ गुजरात की “गिर” जर्सी और हिमाचल की देसी गिरी नस्ल की गायें प्रतिदिन चार सौ लीटर से भी अधिक दूध का उत्पादन कर रही हैं। गुणवत्ता और शुद्धता के चलते निरन्तर बढ़ रही दूध की मांग जिला के “श्वेत क्रांति” अभियान को बल व पहचान दिलवानें के लिए कारगर भूमिका का निर्वहन कर रही है।
श्वेत क्रांति के संवाहक आर्दश गुप्ता की गौशाला की मुख्य विशेषता यह है कि यहां प्रदेश की विलुप्त हो रही भारत की सर्वश्रेष्ठ गिरी नस्ल की गाय के संरक्षण, संवर्धन के अतिरिक्त उस की उपयोगिता को प्रचारित करने पर अत्याधिक बल दिया जा रहा है। जिसके लिए इन्हें राष्ट्रीय गोपाल रत्न के तृतीय पुरस्कार से वर्ष 2018 में सम्मानित भी किया गया।
यह सुखद आश्चर्य है कि आदर्श गुप्ता गौवंश को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। यह प्रतिदिन अपनी गौशाला में “गौवंश” से संवाद करते है बीमार व गर्भवती गायें को स्वयं दवाईयां इन्जैक्शन के अतिरिक्त संतुलित आहार भी देते हैं। दूध देने में आयोग्य गौवंष के लिए फार्म के अलग हिस्से में निर्मित शैड़ में रखकर उनकी सेव की जाती है।
गुप्ता का कथन है कि जिला बिलासपुर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यहां के हजारों परिवार दुग्ध सहकारिता समितियों से जुड़कर “श्वेत क्रांति” को गति दे रहे है। अत्याधिक दुग्ध उत्पादन के लिए यद्यपि किसान हाई ब्रीड़ गौवंश को पालने में प्राथमिकता देते हैं लेकिन “गुणों की खान” अमृत समान दूध देने वाली पहाड़ी गिरी गायं की ओर किसानों का रूझान कम हैं।
आदर्श गुप्ता का सपना है कि प्रत्येक किसान पशुपालक के आगंन के खुंटे में पहाड़ी गिरी गाय का बसेरा हों ताकि हर भारतीय को शुद्ध गुणवत्ता पूर्वक दूध मिल सके और किसानों को भरपूर पैदावार के लिए रसायनिक रहित प्राकृतिक गुणों से परिपूर्ण निशुल्क गोबर की खाद प्राप्त हो और अधिक से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सजित हो ताकि बेरोजगारी की समस्या पर लगाम लगे और किसान अपनी बंजर होती भूमि पर पुनः लहलहाती फसलों का अवलोकर कर सके।



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