* " भ्रष्टाचारी " मीडिया को खरीदने का दम भरता हो, फिर आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि भला मीडिया से कौन डरता है।
" भ्रष्टाचारी " मीडिया को खरीदने का दम भरता हो, फिर आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि भला मीडिया से कौन डरता है।
राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर इस वर्ष विषय दिया गया है मीडिया से कौन डरता है।
मीडिया से कौन नहीं डरता है।
प्रश्न वाकई ही मीडिया को आईना दिखाने वाला है ।
कि मीडिया से कौन नहीं डरता है। लगता है वर्तमान में मीडिया
"सूचना संवाहक" नहीं डरने डराने का जिम्मा संभाले हुए हैं।
साहब मीडिया से आखिर कोई डरे भी तो क्यों डरे ।
क्योंकि मीडिया समाज का एक सजग प्रहरी है ।
लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है।
" प्रहरी के भरोसे सब कुछ छोड़ कर जब समाज चैन की नींद सोता है तो वह मीडिया उसे डराता नहीं साहब सहलाता है।"
मीडिया आमजन की समस्याओं, उसके दर्द के निदान ,उसकी मूलभूत जरूरतों को पूर्ण करने के लिए सरकार को जगाता है । तर्क देकर समझता है
साहब सरकार और आमजन के बीच का सेतु " मीडिया" ,
डरने या डराने की बात नहीं करता।
* वास्तविकता यह है कि जिसकी " उजली चादर " पर कोई दाग नहीं है.....
वह मीडिया से नहीं डरता है।*
ब्रह्मांड के प्रथम संदेशवाहक,
ऋषि नारद मुनि की परंपराओं का निर्वहन करते हुए वर्तमान मीडिया का चेहरा ,
अपने अस्तित्व के में आने के बाद अनेकों पड़ावों पर विश्राम करता हुआ जिस अवस्था में यहां तक पहुंचा है भला उस से अब कौन डरेगा।
यह बात शत प्रतिशत सत्य है कि मीडिया जब सच्चाई का साथ देकर लोकहित की बात करता है,
मुद्दों को सुलझाने और अधिकार दिलाने की बात करता है ।
हक बात करता है। अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है।
तब साहब "शासन-प्रशासन" तक भी उससे डरता है।
* मीडिया की , दार्शनिकता, दूरदर्शी सोच, भावनात्मक और प्रेरणा दायक,
निर्विवाद छवि,
स्पष्ट वादिता वचनबद्धता,
नियमों की परिधि के ज्ञान, उसूलों के प्रति प्रतिबद्धता मीडिया कर्मी की पहचान को परिलक्षित करती है।
लेकिन वर्तमान में इन गुणों से कौन परिपूर्ण है ?
शायद जिस मीडिया के पास यह गुण नहीं है उससे कोई भी नहीं डरता।
जिस समाज में भ्रष्टाचार का बोलबाला हो
हर भ्रष्टाचारी मीडिया को खरीदने का दम भरता हो,
साहब फिर आप खुद ही अंदाजा लगाइए कि मीडिया से कौन है डरता है।
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